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गीत ग़ज़ल ( geet gazal )

तुझको अहले वफ़ा समझा था सारे जमाने से जुदा समझा था तू भी बेवफा निकला मासूम तुझे तो हमने खुदा समझा था

Sunday, August 3, 2008

दिलबर

दिल में समा जाओ ,मेरी जानआ जाओ
तुम्हें चूम लूँगा मैं , बांहों में आ जाओ
हमने यही सजनी सपना सजाया है
Posted by geet gazal ( गीत ग़ज़ल ) ) at 12:30 AM
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      • खुश रहो
      • कभी कातिल
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      • आप सुन
      • हवा का रुख
      • दर्द
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      • दिलबर
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